प्रत्याशी चयन पर मंथन, सूची जल्द ही

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भुवनेश्वर (चुनाव डेस्क)। ओडिशा में उम्मीदावारों के चयन की प्रक्रिया जारी है।। बीजेपी, कांग्रेस और बीजेडी के नेताओं ने जिताऊ प्रत्याशी उतारने का फार्मूला तय किया है। खबर के अनुसार कई सीटों पर हालांकि सूची लगभग तैयार है पर फाइनल टच दिए जाने के बाद ही यह जारी की जाएगी। बीजेडी अध्यक्ष मुख्यमंत्री नवीन पटनायक का कहना है कि जिताऊ प्रत्याशी ही लड़ाया जाएगा। बीजेडी में विधानसभा और लोकसभा सीटों के लिए दावेदारों की भीड़ सी लगी है। नेतृत्व को यह तय करना मुश्किल हो गया है कि चयन प्रक्रिया कैसे की जाए। टिकट पर अंतिम निर्णय नवीन पटनायक को लेना है। उधर बीजेपी के ओडिशा प्रभारी महासचिव अरुण सिंह ने कहा कि प्रत्याशियों की सूची अगले हफ्ते तक घोषित कर दी जाएगी।

कांग्रेस ने भी संभावित सूची तैयार कर ली है। प्रदेश कांग्रेस के कार्यवाहक अध्यक्ष चिरंजीव बिस्वाल का कहना है कि प्रत्याशियों की पहली सूची 17 या 18 मार्च को जारी की जाएगी। वरिष्ठ नेता प्रदीप माझी का कहना है कि 16 मार्च को स्क्रीनिंग कमेटी की मीटिंग होगी। पार्टी के सूत्र बताते हैं कि नवंरगपुर, कालाहांडी क्रमशः माझी और भक्त चरणदास लड़ेंगे। वी.चंद्रशेखर ब्रह्मपुर लोकसभा सीट तो सप्तगिरि उल्का का कोरापुट से लड़ना लगभग तय माना जा रहा है। लोकसभा की इन सीटों पर पहले चरण 11 अप्रैल को चुनाव होना है। इसके अलावा 63 विधानसभा सीटों पर भी सिंगल पैनल है।

बीजेपी में भी केंद्रीय नेतृत्व ने प्रत्याशी चयन को लेकर मंथन जारी है। नेतृत्व ने 21 लोकसभा सीटों और 147 विधानसभा सीटों पर फीडबैक ले लिया है। पुरी संसदीय सीट से राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा के नाम की चर्चा है। पात्रा पुरी में डेरा डाले हैं। धर्मेंद्र प्रधान को कंधमाल से लड़ाये जाने की चर्चा है। बालासोर से प्रताप सारंगी, सुंदरगढ़ जुएल ओरम, भुवनेश्वर से अपराजिता सारंगी का नाम चल रहा है। बीजेपी की तैयारी काफी पहले से चल रही है। हालांकि बीजद के पास मजबूत संगठन और नवीन पटनायक जैसा लोकप्रिय चेहरा भाजपा की बड़ी चुनौती जरूर है। भगवा ब्रिगेड यहां बूथ स्तर तक मजबूती से काम कर रही है। मोदी सरकार के चार साल के दौरान पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का कद लगातार बढ़ा है। प्रधानमंत्री और पार्टी अध्यक्ष के चहेते होने की वजह से प्रदेश भाजपा में उन्हें भावी मुख्यमंत्री प्रत्याशी के रूप में देखा भी जा रहा है। लोकसभा और विधानसभा का साथ चुनाव होने से मोदी ओडिशा को शायद कम समय दे पाएंगे, तो पटनायक के लिए यह अच्छा ही शगुन होगा। पटनायक से टक्कर लेने के लिए भाजपा यहां छोटी पार्टियों से भी गठजोड़ की कोशिश में है।