पुरी में बाहुड़ा यात्रा को गुडिचा में रथ तैयार, बस महाप्रभु का है इंतजार

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भुवनेश्वर। बहुप्रतीक्षित बाहुड़ा यात्रा शुक्रवार को गुंडिचा मंदिर से निकाली जाएगी। अपरान्ह महाप्रभु जगन्नाथ, बलभद्र, देवी सुभद्रा और सुदर्शन चक्र के विग्रह रथ से श्रीमंदिर को ले जाए जाएंगे। पूरे नौ दिन भगवान अपने भाई-बहन के साथ मौसी के घर में रहे। जगन्नाथ संस्कृति मे इसे को बाहुड़ा यात्रा कहा जाता है। लाखों की संख्या में भक्तगण श्रीक्षेत्र जगन्नाथ धाम पुरी पहुंचते हैं। बाहुड़ा से पूर्व नौमी के दिन सबेरे से शाम तक लाखों भक्तों ने भगवान के दर्शन किए। मौसी मां मंदिर पूरी रीति नीति में श्री विग्रहों की पहंडी विजे सम्पन्न होने के बाद गजपति महाराज के छेरापहंरा नीति सम्पन्न होने के बाद शुक्रवार को करीबन ढाई बजे श्री विग्रहों के तीनों रथों को सिंहद्वार के लिए खींचा जाएगा। क्षेत्रीय मौसम विभाग ने पुरी समेत पश्चिम ओडिशा और कोस्टल जिलों में 24 घंटे के भीतर झमाझम भविष्यवाणी से ऐसा समझा जा रहा है कि भक्तों की संख्या कम हो सकती है पर गुरुवार को सरकारी और प्राइवेट वाहनों पुरी जाने वालों का सिलसिला जारी रहा। वहां के सभी होटल, सरकारी अतिथि गृह भक्तों से भरे पड़े हैं। फुटपाथ और समुद्र तट की रेत के बिस्तर पर रात बिताने की वालों की संख्या बहुतायत में है।

जगन्नाथ धाम पुरी केंद्र में प्रवेश करने वाले तमाम मार्ग पर वाहनों की जांच कर शहर के अंदर छोड़ा जा रहा है। तट रक्षकों के साथ पुख्ता सुरक्षा के इंतजामात किए गए हैं। बाहुड़ा यात्रा में भक्तों को किसी भी तरह की असुविधा न होने देने की व्यवस्था का दावा किया गया है। करीब दस हजार से अधिक सुरक्षा बलों की तैनाती की गयी है। बाहुड़ा यात्रा के लिए 250 अधिकारी सुरक्षा व्यवस्था में रहेंगे। सुरक्षा के इंतजाम आईजी सोमेंद्र प्रियदर्शी के नेतृत्व में की जा रही है। श्रीजगन्नाथ पंजिका के मुताबिक नवमी के दिन सुबह 6 बजे से शाम सात बजे तक लाखों भक्तों ने गुंडिचा मंदिर में महाप्रभु जगन्नाथ, बलभद्र, सुभद्रा और सुदर्शन चक्र के दर्शन किए। कल यानी शुक्रवार को बाहुड़ा यात्रा सुबह आठ बजे से प्रारंभ की जाएगी। शनिवार को उनका सोनावेश होगा। विग्रहों को जेवरों से सजाया जाएगा। कहा जा रहा है कि मौसमी बरसात की संभावना के बाद भी भक्तों की भीड़ है।