पिछले चुनाव के मुकाबले कम मतदान, नेता परेशान

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भुवनेश्वर। दूसरे चरण में मतदान का प्रतिशत पांच में चार संसदीय क्षेत्रों में थोड़ा सा गिरना चुनाव विश्लेषकों और राजनीतिक दलों के विचारणीय प्रश्न बन गया है। हालांकि कहा जाता है कि इतना गिरना और बढ़ना तो कोई बड़ी बात नहीं है। फिर कम मतदान के चलते नेताओं के माथे पर चिंता की लकीरें हैं। इसी 23 अप्रैल को तीसरे चरण के मतदान पर निगाहें टिकी है। मुख्य चुनाव अधिकारी के अनुसार दूसरे चरण में पांच लोकसभा क्षेत्र में ओडिशा में 72.56 प्रतिशत मतदान हुआ। पांच में से चार लोकसभा क्षेत्रों में मतदान में अपेक्षाकृत थोड़ी गिरावट आयी। दूसरे चरण में 73.7 प्रतिशत महिलाओं ने तो 71.4 प्रतिशत पुरुषों ने वोट डाले।

बरगढ़ में रिकार्ड तोड़ मतदान

ताज्जुब तो यह है कि कड़ी धूप 43 से 44 डिग्री सेल्सियस तक तापमान के बाद भी बरगढ़ लोकसभा क्षेत्र में 77.57 प्रतिशत मतदान हुआ। इस क्षेत्र की विधानसभा सीट बिजैपुर से खुद मुख्यमंत्री नवीन पटनायक लड़ रहे हैं।

दूसरे चरण का सबसे कम मतदान आसका लोकसभा क्षेत्र का रहा जहां 66.30 प्रतिशत मतदान रहा। सुंदरगढ़ लोस क्षेत्र में 71.44 प्रतिशत, बलंगीर लोस क्षेत्र में 72.42 प्रतिशत रहा और लोस क्षेत्र कंधमाल में 72.88 प्रतिशत मतदाताओं ने वोट डाले। यह आंकड़ा ओडिशा के मुख्य चुनाव अधिकारी सुरेंद्र कुमार ने दिया। दूसरे चरण में बरगढ़, बलंगीर, सुंदरगढ़, आसका और कंधमाल लोस क्षेत्र व 35 विस क्षेत्र में हुआ था। मतदान पिछले चुनाव 2014 में 72.44 प्रतिशत रहा था।

2014 के मुकाबले कम पड़े वोट

यदि बीते चुनाव से तुलना करें तो इन चुनाव क्षेत्रों में मतदान थोड़ा सा गिरा। इसी बरगढ़ लोस सीट पर 2014 में 78.71 प्रतिशत वोट पड़ा था। अबकी यहां 77.57 प्रतिशत है। बीते चुनाव में सुंदरगढ़ में 71.66 प्रतिशत, बलंगीर और कंधमाल में लोकसभा क्षेत्र में क्रमशः 74.92 प्रतिशत और 73.43 प्रतिशत पड़ा था। हां आसका लोकसभा क्षेत्र में अबकी मतदान का प्रतिशत बढ़ा। वर्ष 2014 के चुनाव  में 63.63 प्रतिशत वोट पड़ा था जबकि 2019 में यह 66.30 प्रतिशत ही रहा।

पहले चरण के मुकाबले कम हुआ

2019 के चुनाव में पहले चरण के मुकाबले दूसरे चरण में मतदान का प्रतिशत थोड़ा गिरा। पहले चरण में 11 अप्रैल को चार लोकसभा सीटों पर 73,76 प्रतिशत मतदान हुआ था और दूसरे चरण में 18 अप्रैल को पांच लोस व 35 विस सीटों के लिए 72.56 प्रतिशत वोट पड़ा। इस चरण में कई जगह मतदान डिस्टर्ब रहा। राजनीतिक विश्लेषक वरिष्ठ पत्रकार केदार मिश्रा कहते हैं कि इस गिरावट के कई कारण हो सकते हैं। ओडिशा का मौसम गरम है। कड़ी धूप, दूसरे मतदान केंद्रों में ईवीएम की खराबी के कारण विलंब से मतदान शुरू हुआ। बहुत से मतदाता बिना वोट डाले ही चले गए। माओ प्रभावित इलाकों में मतदान के प्रतिशत पर थोड़ा असर पड़ा।

माओ प्रभावित इलाकों का हाल

जहां एक ओर पहले चरण में माओ आतंक के कारण कई मतदान केंद्रों में शून्य प्रतिशत मतदान हुआ वहीं दूसरे चरण में कंधमाल जैसे माओ प्रभावित लोस क्षेत्र में 72.88 प्रतिशत मतदान हुआ। यहां पर एक महिला पोलिंग अधिकारी की हत्या भी कर दी गयी थी। हालांकि 2014 के चुनाव में कंधमाल में 73.43 प्रतिशत मतदान के मुकाबले अबकी बार थोड़ा कम मतदान 72.88 प्रतिशत हुआ है। इन हालात में इसे संतोषजनक बताया जा रहा है।