पश्चिम ओडिशा में सोल्लास मना नुआखाई जुहार

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संबलपुर। पश्चिम ओडिशा में 14 सितंबर से नुआखाई त्योहार धूमधाम से मनाया गया। संबलपुर में मां सम्बलेश्वरी, कालाहांडी में मां मानिकेश्वरी, बलंगीर में मां पटनेश्वरी, सोनपुर में मां सुरेश्वरी और सुंदरगढ़ में मां शेखरवासिनी को नये धान की पैदावार से चावल के तरह-तरह के पकवान बनाकर भोग लगाया गया। इसी प्रकार हर गांव में ग्राम देवता को भी भोग लगाया गया।

अगले साल बेहतर फसल की कामना की गयी। सुबह से ही नुआखाई जुहार के ग्रीटिंग्स का सिलसिला चल निकला। सोशल मीडिया में त्योहार पर एक दूसरे को बधाई देते रहे। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और आदिवासी कल्याण मंत्री जुएल ओरम ने भी नुआखाई पर लोगों को बधाई दी।

हालांकि कहा जाता है कि यह त्योहार पश्चिम ओडिशा के लोग मनाते हैं पर अब तटीय क्षेत्र और सीमावर्ती प्रदेशों के लोग भी धूमधाम से मनाते हैं। एनसीआर, सूरत (गुजरात) में भी भारी संख्या में रह रहे ओडिशावासी इस त्योहार मनाते हैं। मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने अपने संदेश में ओडिशावासियों की समृद्धता की कामना की।

संबलपुर समेत पश्चिम ओडिशा के दसों जिलों में नुआखाई सोल्लास प्रतिवर्ष मनाया जाता है। देवी मां सम्बलेश्वरी मंदिरों की सजावट पूजा अर्चना व उन्हें प्रतीकात्मक भोग लगाकर त्योहार की शुरुआत की गयी। कुल देवता की भी उसी भाव से पूजा की जाती है।

कृषक संगठन समन्वय समिति के संयोजक बरगढ़ के लिंगराज बताते हैं कि त्योहार पर धान की नई फसल से तरह-तरह के पकवान बनाए जाते हैं जिनका देवी देवताओं को भोग लगाया जाता है। धरती मां का आभार जताते हुए अगले साल अच्छी फसल की कामना की गई। किसान नेता अशोक प्रधान कहते हैं कि बाढ़ और सूखा से जूझने और किसान आत्महत्या की घटनाओं के बाद भी नुआखाई लोगों में आशा का संचार कर जाता है। यह त्योहार उनकी आस्था का प्रतीक बन चुका है। उन्हें लगता है कि अगले साल अच्छी फसल होगी। इसी उम्मीद के साथ किसान खेतीबारी में जुट जाते हैं।

नुआखाई किसानों को कड़ी मेहनत बेहतर फसल का संदेश देता है। उन्हें लगता है कि अगले साल अच्छी फसल होगी तो वह अपने ईष्ट देवी देवताओं को भोग लगा सकेंगे। यह त्योहार किसानों में नैतिक साहस के साथ ही विषम परिस्थियों में भी धरती से बेहतर अन्न उगाने की हिम्मत जुटाता है और किसान उसी जुगत में जुट जाता हैं।