दीवार व छत धसकने से 12 की मौत, नवीन ने हवाई सर्वेक्षण किया

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भुवनेश्वर। तितली चक्रवाती तूफान का असर ओडिशा में दिखने लगा है। भारी बारिस से मिट्टी के घरों, दीवारों व टीलों में भूस्सखलन की घटना से गजपति में देर रात 12 लोगों के मारे जाने की खबर है। इनमें पांच बच्चे हैं। यह घटना रेयगड ब्लाक की है। रिपोर्ट के अनुसार मरने वालों में दिनेश भुयान, गगनजानी, मीनाक्षी साबर, गंगाधर बेहरा, जयचंद्र भुयान, चंपा भुयान, सोमनाथ जानी सुमित्रा भुयान, दंडपानी भुयान, श्रीमती जानी, लालू बेहरा व जिगवान साबर हैं। यह भी पता चला है कि गंगाबाड़ा पंचायत पांच परिवारों के 12 घरगिरी की घटना में दब गये। ये लोग बाढ और तितली चक्रवात से बचने के लिए निकलने की तैयारी मैं थे। गरबंधा थाना के प्रभारी प्रशांत भूपति ने बताया कि घटनास्थल सुदूरवर्ती क्षेत्र की है। राहत और पुनर्वासन की व्यवस्था की जा रही है। विशेष राहत आयुक्त विष्णुपद सेठी ने घटना की पुष्टि करते हुए कलक्टर और पुलिस अधीक्षक से मौका मुआयना करने को कहा।

किसानों की फसल और आधारभूत ढांचा का भारी नुकसान हुआ है। मुख्यमंत्री नवीन पटनायक हवाई सर्वेक्षण करेंगे। बीते 33 घंटों से लगातार बारिश से हालात खराब हो रहे हैं। ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर की सड़कें तक लबालब हैं। गंजाम, गजपति व रायगढ़ा में बाढ़ के कारण हालत ज्यादा खराब है। राज्य नौ जिलों में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो गयी है। ऋषिकुल्या, वंशधारा व बौधा नदी में पानी बढ़ रहा है। शासन ने राहत कार्य तेज कर दिए हैं।

गंजाम जिले की बौधा नदी पर कलिंगदला बैराज के पास फुटओवर ब्रिज को बाढ़ का पानी छूने लगा है। ऋषिकुल्या नदी का पानी आस्का जेल मुख्य द्वार से घुसने लगा है। नदी के बेंगेदेंगा घाट की कच्ची चमीन धसकने लगी है। सारी मिट्टी नदी में मिल रही है।

शुरुआती आंकलन के मुताबिक 1514 घरगिरी की घटनाएं हुई हैं। पुरी में 38 तथा कंधमाल में 21 घर ढह गए। कुल 85,612 हेक्टेयर फसल क्षेत्र सिर्फ गंजाम जिले का नष्ट हुआ है। कुल 50,000 पशुधन पर असर पड़ा है जिसमें 1543 पशु मर चुके हैं। गजपति जिले में 13,139 लोगों को विस्थापित करके सुरक्षित क्षेत्र को ले जाकर 161 आशियानों रखा गया।

प्राकृतिक आपदा प्रबंधन के तहत सुरक्षा बल सड़को के बीच टूटे पड़े पेड़ों को काटकर रास्ता साफ करने में लगे हैं। अग्निशमन के महानिदेशक खुद राहत कार्यों की मॉनीटरिंग कर रहे हैं। छह राहत दल नावों के साथ गजपति में जुटे हैं। गंजाम में विस्थापितों के लिए 395 रसोई घर खोले गए हैं जो पक्का खाना खिला रहे हैं। यहां पर 94,265 लोगों को खतरे से बाहर निकाल कर अन्यत्र ले जाया गया। अब तक 683 आश्रयगृह बनाए गए हैं। सभी जरूरी सड़कों पर पेड़ आदि हटा दिए गए हैं। स्वास्थ एवं चिकित्सा की टीमें सक्रिय हैं। इसी प्रकार रायगढा जिले में राहत कार्य युद्धस्तर पर किए जा रहे हैं।

नदियां उफान पर, नेवी का हेलीकाप्टर राहत में जुटा

चक्रवाती तूफान के जाने के बाद बारिस का कहर शुरू है। ओडिशा की अधिकतर नदियां खतरे के निशान के ऊपर हैं। सबसे ज्यादा प्रभावित गंजाम, भद्रक, बालासोर जिला हैं। यहां पर रुक-रुककर बारिश हो रही है। बैतरणी नदी 17.83 मीटर खतरे के निशान से ऊपर 18.03 मीटर पर बह रही है। बालासोर की जलाका नदी भी खतरे के निशान से ऊपर पहुंच रही है। यह नदी साढ़े पांच की बजाय साढ़े छह मीटर पर है। ऋषिकुल्या नदी निचली सतह वाले क्षेत्रों के लिए कहर बनी है। मुख्यमंत्री नवीन पटनायक द्वारा गठित तीन सदस्यी मंत्रिमंडल टीम ने गंजाम का दौरा किया। टीम ने छतरपुर में जिला प्रशासन के साथ बैठक की और हालात का जायजा लिया। कमेटी में कैबिनेट मंत्री महेश्वर महंति, सुशांत सिंह व रमेशमाझी हैं। राहत कार्यों के लिए नेवी का हेलीकाप्टर का प्रयोग किया जा रहा है। टीम गजपति व रायगढ़ा भी जाएगी।

 

 

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