जोहानिसबर्ग में गाधी निवास को म्यूजियम बनाने को मोदी से कहूंगा-सुब्बाराव

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कटक 10 जुलाई। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी तीन साल तक साउथ अफ्रीका के जोहानिसबर्ग में किराये के मकान में रहे थे। इसे गांधी म्युजियम की शक्ल देने की पहल मनमोहन सरकार के कार्यकाल में हुई थी। अब इस कार्य को मोदी सरकार से कराने के लिए प्रयास करूंगा। पत्र लिखूंगा और मिलूंगा भी। यह बात प्रख्यात गांधीवादी विचारक डा.एसएन सुब्बाराव ने एक बातचीत में कही। भाई जी के नाम से पुकारे जाने वाले सुब्बाराव को दूसरी तरफ अफसोस है कि उनके पत्रों को प्रधानमंत्री कार्यालय तवज्जो नहीं दे रहा है। हाल ही में रेल यात्रा सुविधा समाप्त किए जाने पर उन्होंने पत्र लिखा था पर पीएमओ से जवाब आज तक नहीं आया। वह बताते हैं कि रेलयात्रा की सुविधा समाप्त कर दी गयी। रेलमंत्रालय से नीती आयोग को भेजा गया था पर आयोग ने इसे रद्द कर दिया। तभी उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय को लिखा था। वह कहते हैं कि समय-समय पर लिखता रहूंगा।

राष्ट्रीय एकता और अखंडता को बनाए रखने को देश दुनिया में भाईजी के नाम से फेमस डा.एसएन सुब्बाराव माह अक्तूबर में कटक एक बड़ा यूथ कैंप करने वाले हैं जिसकी तैयारी के सिलसिले में वह आजकल ओडिशा में हैं। यह कैंप ओडिया समाचार पत्र समाज के 100वें वर्ष पर आयोजित होगा जिसमें देश के सभी राज्यों की भागीदारी होगी। भाई जी ने कैंप स्थल का निरीक्षण भी किया। चम्बल के बीहड़ जंगलों के 654 कुख्यात डाकुओं को समाज की मुख्य धारा से जोड़ कर सुर्खियों में आए सुब्बाराव आज देश विदेश में एक गांधीवादियों में जाने माने जाते हैं। राष्ट्र निर्माण में युवाओं के योगदान को लेकर वे पिछले 48 सालों से काम कर रहे डॉ सुब्बाराव देश के कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित व नवाजे चुके हैं। देश के सबसे बड़े गांधीवादी माने जाने वाले 91 साल के सुब्बाराव उन प्रमुख लोगों में है जो 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन में शामिल हुए और जेल भी गए थे। भाईजी जवाहरलाल नेहरू और कामराज जैसे नेताओं के संपर्क में रहे हैं। उन्होंने 1954 में पहला गांधी आश्रम बागियों के लिए दस्यु प्रभावित चंबल के जौरा गांव में दस महीने तक कैंप किया। इसका नतीजा यह रहा कि कुख्यात डकैत मोहर सिंह, माधौ सिंह समेत दर्जन डकैतों को सरेंडर कराया था। वह कहते हैं कि उन्हें दुख होता है जब लोग विदेश में उनसे कहते हैं कि इंडियंस वक्त के पाबंद नहीं हैं, अनुशासित नहीं हैं, भ्रष्टाचार पीड़ा पहुंचाता है। महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराध शर्मसार कर देते हैं। कटक में भाईजी से हुई बातचीत के संक्षिप्त अंश इस प्रकार हैं।

वह कहते हैं कि भारत में कई भाषाएं हैं और धर्म हैं। उसके बाद भी हम सब एक हैं, इसलिए क्योंकि हमारा देश गणतंत्र है, उसका कोई धर्म नहीं है। वह कहते हैं कि धर्म के नाम पर 1947 में हमसे अलग हुए पाकिस्तान में सिर्फ छह भाषाएं थीं। इसके बाद भी भाषा के आधार पर उसका एक बड़ा बटवारा हो चुका है, क्योंकि वहां इस्लामिक गणतंत्र है। हमारे न टूटने की वजह लोगों में व्याप्त देशभक्ति की भावना ही रही है। वह कहते हैं कि जो भी व्यक्ति जिस भूमिका में है वह उस भूमिका का आनंद ले। हां, उसमें यह अहसास रहे कि वह इस भूमिका से राष्ट्र निर्माण में योगदान दे रहा है। चपरासी से लेकर अधिकारी तक सबका योगदान अहम है। यह बात समझना होगी, लेकिन देखने में आता है कि लोग जो काम कर रहे हैं, उसे वे केवल नौकरी मानते हैं। जब उनसे पूछा जाता है कि उनका उद्देश्य क्या है तो जवाब देते हैं कि उन्हें 8 घंटे काटने हैं। इसके एवज में उन्हें तनख्वाह मिलती है। जब वे यह समझने लगें कि उनके यह आठ घंटे देश के लिए कितने अहम हैं और वे इसके माध्यम से देश के विकास में योगदान कर रहे हैं, तब ही देशभक्ति की भावना विकसित होगी। इसके लिए लोगों को प्रेरित करने की जरूरत है।

भाईजी दुखी मन से कहते हैं कि गांधी के देश में सहिष्णुता खत्म हो रही है। कार पार्किंग के विवाद में मर्डर तक हो जाते हैं। यह भारत का चरित्र नहीं है। हिंसामुक्त, नशामुक्त की परिकल्पना थी गांधी जी की। केवल गांधी के चश्मे का इस्तेमाल करके भारत नहीं बदलेगा। भाईजी कहते हैं कि नशाबंदी के बाद बिहार के हालात सुधरे हैं। नशाबंदी पूरे देश में लागू होनी चाहिए। दलितों पर अत्याचार की घटनाएं खतरनाक हैं।