जगन्नाथ जी को भोग नहीं लग सका, लाखों का महाप्रसाद नष्ट हुआ

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रीतिनीति में चार घंटा विलंब, सेवायतों का धरना

दो साल बाद जगमोहन भक्तों के लिए खोला गया

पुरी। श्रीजगन्नाथ मंदिर प्रशासन और सेवायत आमने-सामने आ गए। रत्न सिंहासन के सेवायतों की कमी के कारण महाप्रभु जगन्नाथ की रीतिनीति में चार घंटा विलंब हुआ। इसके कारण भगवान को मध्यान्ह में भोग नहीं लग सका और भक्तों के लिए महाप्रसाद की आपूर्ति नहीं हो सकी। इसके विरोध में रसोई में लगने वाले सेवायत धरने पर बैठ गए। एक अनुमान के मुताबिक करीब 30 लाख का नुकसान हुआ।

हाईकोर्ट ने रत्न सिंहासन के निर्धारित सेवायतों के ही गर्भगृह में जाने की अनुमति दी थी। यह नियम पहले भी था। सोमवार को दो सेवायतों के गैर हाजिर होने के कारण विलंब हुआ और महाप्रसाद तैयार होने के बाद भी न भोग लगाया जा सका और न ही भक्तों को महाप्रसाद दिया जा सका। इस अव्यवस्था से लाखों भक्त महाप्रसाद नहीं पा सके। धरने पर बैठे रसोई के सेवायतों ने गर्भगृह में सेवायत बढ़ाने के साथ ही यह भी मांग की है कि खराब हो चुके महाप्रसाद की भरपायी मंदिर प्रशासन करे।

सेवायतों का कहना है कि रत्न सिंहासन में नियमित रूप से नियुक्त सेवायतों को ही गर्भगृह जाने के हाईकोर्ट के आदेश के कारण यह अव्यवस्था हुई। इनमें रसोई का काम देखने वाले भी शामिल थे। उनका कहना है कि नियम उदार होते तो रीतिनीति का पालन नियमित होता रहता। यदि सेवायत किन्हीं कारणवश गैरहाजिर हैं तो इसका खामियाजा रसोई में तैयार होने वाले महाप्रसाद पर क्यों पड़े?

हाईकोर्ट के निर्देश पर सोमवार से जगमोहन (भक्तों के एकत्र होकर दर्शन करने का स्थल) भक्तों के लिए खोला गया। भारी संख्या में लोगों ने दर्शन किए। सेवायतों का कहना है कि रत्न सिंहासन के लिए तैनात सेवायतों की संख्या कम है। हाईकोर्ट का यह आदेश अव्यावहारिक है कि जो सेवायत वहां के लिए अधिकृत हैं वही जा सकते हैं। उनका यह भी कहना है कि इससे व्यवस्था बिगड़ जाती है। कोर्ट इस निर्णय पर पुनर्विचार करे। जगन्नाथ सेना नामक संगठन ने सेवायतों के धरने का समर्थन करते हुए कहा कि हाईकोर्ट को अपने निर्णय पर पुनर्विचार करना चाहिए।

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