गठबंधन में छेद कर पराए मतों पर ऐश कर रही है कांग्रेस

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अनूप बाजपेयी

कानपुर। पूरे देश में चुनावी बयार बह रही है और इस चुनावी मौसम का केन्द्र बिंदु हमेंशा की तरह उत्तर प्रदेश ही है। यहां राजनीतिक समर में इस मर्तबा कभी राजनीति की दो धुरियां माने जाने वाली समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी गठबंधन कर के मैदान में हैं। यह गठबंधन खासा मजबूत माना जा रहा है। सत्तारूढ भारतीय जनता पार्टी को यह गठबंधन काफी परेशान कर रहा है। गठबंधन से कांग्रेस ने दूरी बना रखी है। राजनीतिक अहम के चलते सपा बसपा गठबंधन ने भी कांग्रेस को कोई भाव नहीं दिया पर कांग्रेसी रणनीतिकारों ने गठबंघन में ही छेद कर के अपनी ऐसी बिसात बिछा दी है कि सपा बसपा अवाक रह गयी है और उनके गढों में कांग्रेसी झंडा फिलहाल बुलंदी से लहराता दिख रहा है।

कांग्रेस ने पहली विकेट गिराया बसपा के गढ बुंदेलखंड में, यहां कांग्रेस ने कभी  बसपा के संस्थापक कांशी राम के खास सलाहकार ब्रजलाल खाबरी को तोडा और पार्टी ही नही ज्वाईन करवायी बल्कि जलौन से उन्हें मैदान से भी उतारा है। खाबरी के चलते यूं भी कांग्रेस में दलित मतों का कुछ प्रतिशत बढना ही है साथ ही जालौन के साथ साथ झांसी-ललितपुर, बांदा, हमीरपुर और चित्रकूट की सीटों पर भी असर पडना लाजमी है। बुंदेलखंड के राजनीतिक पंडित कहते हैं कि खाबरी फैक्टर इस बार कांग्रेस के पक्ष में निश्चित ही काम करेगा। 32 साल बसपा में रह कर ब्रजलाल खाबरी ने जमीन पर काफी काम किया है जिसका फायदा कांग्रेस को मिल सकता है। उधर कांग्रेस ने बहराईच से एक और खाटी बसपाई सावित्री बाई फुले को टिकट दिया है। इस रिर्जव सीट से फुले मजबूत दावेदार तो हैं ही आसपास की सीटों पर भी इसका प्रभाव दिखाई देना लाजमी है। ऐसे ही सीतापुर से कैसरजहां भी हैंम जो कभी बसपा की सांसद रही है। उनकी भी जमीनी पकड काफी मजबूत मानी जा रही है। कभी बसपा के प्रदेश अघ्यक्ष रहे के के सचान भी कुर्मी मतों को कांग्रेस की तरफ लाने में योगदान दे सकते है। इघर काग्रेसी दिग्गजों ने समाजवादी पार्टी के बडे नेता राकेश सचान को पार्टी सें जोडा औऱ फतेहपुर से टिकट दे कर मैदान में उतार दिया है। सचान के आने से फतेहपुर, जहानाबाद, घाटमपुर, भॉगीपुर, कन्नौज की इस बेल्ट पर कुर्मी मतों के डांवाडोल होने की उम्मीद जताई जा रही है। हांलांकि कुर्मी मतों पर भाजपा का  शेयर सबसे ज्यादा है पर उसके बाद नम्बर सपा का ही आता था पर राकेश सचान के जाने से इन मतों का बडा प्रतिशत कांग्रेस की ओर खिसक सकता है। रही कांग्रेस नेताओं की बात तो कानपुर से श्रीप्रकाश जायसवाल, मुरादाबाद से राज बब्बर, कुशीनगर से आरपीएन सिंह, झांसी से प्रदीप जैन, फरूखाबाद से सलमान खुर्शीद, सुल्तानपुर से संजय सिंह और प्रतापगढ से रानी रत्ना सिंह से कांग्रेस कुछ कमाल की उम्मीद कर सकती है। मैनपुरी में सपा के धर्मेन्द्र यादव के लिए कांग्रेस के सलीम शेरवानी सिरदर्द साबित हो सकते हैं।

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