कार्य शैली के चलते डीजीपी पद से विदा हो गए बीके शर्मा

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भुवनेश्वर। नवंबर। बुधवार की रात ओडिशा सरकार ने अचानक पुलिस महानिदेशक बीके शर्मा को हटाने का फरमान जारी कर दिया गया। उन्हें गृह विभाग में ओएसडी के पद पर भेज दिया गया। यह उच्चस्तरीय राजनीतिक और नौकरशाही हल्कों में चौंकाने वाली थी। अभय जो कि हैदराबाद में नेशनल पुलिस अकादमी में निदेशक पद पर थे उन्हें ओडिशा का नया डीजीपी नियुक्त किया गया।

सूत्रों के अनुसार कामकाज में ढिलायी के साथ ही व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, उद्योगों को फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट जारी करने में अनियमितताओं की शिकायतें उन्हें ले डूबीं। वह फायर सेवा के भी डीजी थे। डीजी पुलिस का उनके पास अतिरिक्त प्रभार था। शर्मा को डीजीपी पद से मुक्त करने के पीछे ये कारण बताए जाते हैं। उत्कल कनिका शॉपिंग मॉल का मामला ही ले तो बीते दिनों पुलिस कमिश्नर ने चेकिंग के दौरान फायर सेफ्टी में भारी कमी के साथ ही पार्किंग तक न होने के कारण मॉल को बंद करा दिया। मामला सरकार के संज्ञान में आते ही फायर सर्टिफिकेट जारी करने का अधिकार उनसे लेकर 5-T विभाग को दे दिया गया। ऐसी तमाम शिकायतें बीके शर्मा को ले डूबीं।

दूसरी बात निजी एजेंडा चलाने को लेकर भी शिकायतें थी। उनके बारे में कहा जाता है कि उन्होंने ऑफिशियल प्रोटोकॉल की परवाह ही नहीं की। वीआईपी राजनेताओं की सिक्युरिटी वापस लेना भी एक कारण बना। शर्मा की कार्यशैली से तमाम सरकारी विभाग खुश नहीं थे। ओडिशा सरकार 5-टी फ्रेम और मो सरकार वर्क के भीतर चलायी जा रही है। अक्टूबर माह में इसके लांच किए जाने के दौरान हेल्द और होम विभाग पायलट विभाग की भांति लिए गए। मुख्यमंत्री नवीन पटनायक इसमें किसी भी तरह की लापरवाही पसंद नहीं करते हैं। तभी तो उन्होंने भरोसेमंद अधिकारी वीके पांडियन को इसका इंचार्ज बनाया।

शर्मा का विभाग आए दिन चर्चा में रहता था। बीते दिनों दागी पुलिस अधिकारियों को या तो ट्रांसफर किया गया या फिर सस्पैंड किया गया। सरकार ने फायर सेवा में अनियमितताओं की उच्चस्तरीय जांच के मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कमेटी बना दी। इसमें विकास आयुक्त और गृह सचिव भी सदस्य नामित किए गए। सूत्र बताते हैं कि जांच समिति की रिपोर्ट में शर्मा पर आंच आयी तो ठोस कार्रवाई भी की जा सकती है।

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