ओडिशाः तितली के आने से पहले ही भारी बारिस, तेज हवाएं

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भुवनेश्वर। चक्रवाती तूफान तितली भले ही धीरे-धीरे ओडिशा के तटवर्ती इलाकों की ओर बढ़ रहा है पर गंजाम, पुरी, जगतसिंहपुर, खोरदा और गजपति में मूसलाधार बारिस और तेज हवाएं शुरू हो गयी हैं। सबेरे साढ़े पांच बजे गंजाम जिले के गापोलपुर का समुद्र तट सबसे पहले टकराएगा। इसी के साथ शुरू हो जाएगा तबाही का मंजर। मौसम विभाग की माने तो 160 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार हवाएं कहर बरपा सकती हैं। 11 और 12 अक्टूबर को ओडिशा का तटीय क्षेत्र ठप सा हो जाएगा। इस चक्रवात का असर तड़के कलिंगपट्टनम आंध्र और गोपलापुर ओडिशा में सबसे पहले दिखेगा।

चक्रवाती तूफान नयी बात नहीं

बंगाल खाड़ी के तटवर्ती राज्यों में समुद्री चक्रवात जैसी प्राकृतिक आपदा का प्रलय कोई नयी बात नहीं है। वर्ष 1999 का सुपर साइक्लोन ने जो तबाही मंजर ओडिशा में दिखाया था वह तो आज भी लोगों की आंखों में ताजा है। अब तक का सबसे ज्यादा तबाही मचाने वाला वह चक्रवात था। ओडिशा मे आए चक्रवात हर प्रलय ढाकर खतम हो जाते हैं।

रिपोर्ट के अनुसार 1999 का सुपर साइक्लोन ओडिशा के इतिहास में सबसे ज्यादा प्रलयंकारी बताया जाता है। इसके बाद नरगिस चक्रवात ने ओडिशा का भारी नुकसान किया। ओडिशा आपदा प्रबंधन की रिपोर्ट के अनुसार 31 अक्टूबर 1831 को भयंकर प्रलयकारी चक्रवात ने 50 हजार लोगों की जान ले ली थी। फिर 22 सितंबर 1885 को ओडिशा के तटीय क्षेत्र को तबाह करने वाला चक्रवात आया जिसने 5,000 लोगों की जान ले ली थी। इसके बाद 8 से 11 अक्टूबर 1967 एक और चक्रवात ने तबाही मचायी। पुरी से लेकर पारादीप तक तटवर्ती क्षेत्र प्रभावित रहा। 26 से 30 अक्टूबर 1971 तक के चक्रवात में 10 हजार लोगों का मारे जाने की रिपोर्ट है। फिर 25 से 31 अक्टूबर 1999 सुपर साइक्लोन में 10 हजार लोगों की मौत की सूचना है।

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