एमसीएल को कोल माइंस न देने पर नवीन को ऐतराज, पत्र लिखा

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भुवनेश्वर। ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक केंद्रीय कोयला मंत्री से पूछा कि हाल ही आवंटित चार कोयला खदाने डब्ल्यूसीएल को क्यों दी गयीं? यह खदाने ओडिशा स्थित एमसीएल को क्यों नहीं आवंटित की गयीं।

ओडिशा के हितों की अनदेखी करते हुए केंद्रीय कोयला मंत्रालय ने महाराष्ट्र की एक कंपनी वेस्टर्न कोलफील्ड् लिमिटेड को चार कोयला की खदाने आवंटित कर दी। मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने सख्त ऐतराज जताते हुए कोयला मंत्री पीयूष गोयल को पत्र लिखा। पत्र में पटनायक ने कहा कि राज्य में जब महानदी कोल फील्ड्स लिमिटेड कंपनी है तो फिर वेस्टर्न कोल फील्ड्स को खदाने एलाट करने का भला क्या औचित्य है? ये कोलफील्ड रम्पिया, घोगरपल्ली हैं।

पत्र में नवीन ने लिखा कि कोयला खदानों के काम में स्थानीय प्रशासन से समन्वय भी जरूरी होता है। भू-अधिग्रहण, विस्थापित परिवारों के लिए राहत एवं पुनर्वासन का पहलू भी देखना पड़ता है। इन सबके प्रबंधन के लिए एमसीएल बेहतर स्थिति में है। कोयला इंडिया लिमिटेड की सब्सिडियरी बाहर की है। उन्होंने यह भी कहा कि एमसीएल ने 2017-18 में रिकार्ड 143 मिलियन टन का प्रोडक्शन दिया है। प्रभावित परिवारों के लिए उल्लेखनीय कार्य किए हैं।

पटनायक ने यह भी लिखा है कि मानलीजिए एमसीएल इसे हैंडल न कर पाती तो कोल इंडिया लिमिटेड तालचर कोल्डफील्ड के लिए एक अन्य कंपनी बना सकती है। जनवरी 19 को कोयला मंत्रालय ने कहा था कि सरकार 11 कोयले की खदाने कोल इंडिया लिमिटेड को करने जा रही है। इससे कोयले का सालाना् उत्पादन 225 मिलियन टन हो जाएगा। इन 11 में से चार ओडिशा की हैं जिन्हें डब्ल्यूसीएल को आवंटित किया गया है।

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