एग्जिट पोलः थोड़ा सब्र कीजिए, न घोड़ा दूर न मैदान

0
188

विशेष प्रतिनिधि

भुवनेश्वर। एक्जिट पोल की मानें तो 2019 के इस सेमी फाइनल में बीजेपी की छुट्टी हो जाएगी। पर ये एग्जिट पोल कितने विश्वसनीय होते हैं यह किसी से छुपा नहीं है। नतीजे आने से पहले इस अर्द्ध सत्य के आधार पर चौका चौराहा और चौपाल में बहस जारी ह। कांग्रेस और बीजेपी आमने-सामने हैं। तेलंगाना में तेलंगाना और कांग्रेस आमने-सामने है। यह चखचख तभी शुरू हो गयी थी जब मतदान का पहला चरण छत्तीसगढ़ में 12 नवंबर को हुए मतदान से शुरू हुआ और इसका अंतिम चरण सात दिसंबर को राजस्थान और तेलंगाना में हुए मतदान से खतम हुआ। न्यज चैनलों ने सर्वेक्षण संस्थाओं के सहयोग से मतदाताओं की नब्ज टटोलने की कोशिश की। शुक्रवार की शाम से इन पर खबरिया चैनलों ने बहस मुबाहिस चल रही है।

पांच बार सत्ता परिवर्तन करने वाले राजस्थान में सभी सर्वेक्षण बीजेपी को हारते हुए दिखा रहे हैं। हालांकि बसुंधरा राजे के खिलाफ नाराजगी सूबे में झलकी, विद्रोही और निर्दलियों ने बीजेपी की रोकने में ताकत झोंकी है। पर बताते हैं कि अध्यक्ष अमित शाह की रणनीति ने काफी डेंट ठीक किया है। दिल्ली और अन्य प्रदेशों में बैठकर राजस्थान को देखने से तस्वीर साफ नहीं दिखती। मतदान तिथि आते-आते काफी कुछ ठीक किया गया है पर जनता की नाराजगी यदि ईवीएम में दिखी तो महारानी की विदाई पक्की। पर बीजेपी के हाथ से राजस्थान के फिसलने की बात इसलिए और भी पुरजोरी से कही जा रही है कि ज्यादातर सत्ता समर्थक भी राजस्थान में बीजेपी की हालत पतली बता रहे हैं। दूसरी तरफ तेलंगाना में टीआरएस (तेलंगाना राष्ट्र समिति) को जीतते हुए सभी चैनल बता रहे हैं।

मिजोरम में सत्तादल कांग्रेस की हार और मिजो नेशनल फ्रंट को जीतते हुए बताया जा रहा है। यहां दस साल से कांग्रेस का शासन रहा है। हां, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ पर एग्जिट पोल की नतीजे अलग-अलग बताए जा रहे हैं। इन दोनों राज्यों में चैनलों के सर्वे एक जैसे नहीं दिखते। अगर आप इंडिया टुडे-आजतक, रिपब्लिक टीवी और एबीपी के सर्वेक्षण देखें तो कांग्रेस का पलड़ा मध्यप्रदेश में भारी है। इन चैनलों ने एक्सिस इंडिया, सी-वोटर और सीएसडीएस से अपने-अपने सर्वेक्षण कराए हैं। बीजेपी की हार की भविष्य वाणी उनके समर्थक पचा नहीं पा रहे हैं। हालांकि एग्जिट पोल पर दलों की प्रतिक्रियाएं उनकी सुविधाओं के अनुसार दी जाती हैं। मसलन बीजेपी एग्जिट पोल को झूठा बताते हुए मतगणना तक इंतजार की बात करती है तो कांग्रेस व उसके समर्थक दल सर्वेक्षण से गदगद हैं। चुनाव सर्वेक्षण में सत्ता विरोधी रुझान की बात एकतरफा कही जा रही है। सरकार से किसानों और युवाओं की नाराजगी को कांग्रेस ने भुनाया है। यदि बीजेपी ये राज्य हारती है तो वजह यही हो सकती है। कुछ चैनल जरूर बीजेपी को जीतता हुआ दिखा रहे हैं पर उनकी विश्वसनीयता जनता के बीच सही नहीं है। उन्हें बीजेपी का चैनल कहा जाता है।

छत्तीसगढ़ के चुनाव के एग्जिट पोल बिल्कुल क्लियर नहीं है। त्रिशंकु विधानसभा की बात भी की जा रही है। अजित जोगी और मायावती के गठजोड़ यह परिदृश्य उपस्थित हआ बताया जाता है। सिर्फ दो चैनल एबीपी और इंडिया टीवी ही बीजेपी को चौथी बार सत्ता में आने की बात चीख-चीखकर कह रहे हैं। लेकिन इंडिया टुडे-आजतक, रिपब्लिक टीवी जैसे छत्तीसगढ़ में भी कांग्रेस की बढ़त की बात कह रहे हैं। एग्जिट पोल सर्वे से बीजेपी थोड़ा परेशान है। उसे भी लगने लगा है कि उसका करिश्मा कम होने की ओर है। सत्ता समर्थक चैनल ऐसी बीजपी के कमजोर होने की बात कहते हैं फिर तो बीजेपी को भी गंभीर हो जाना चाहिए। कहीं देश की राजनीति करवट तो नहीं ले रही है? लगता है कि इस चुनाव के नतीजे बीजेपी और कांग्रेस दोनों के लिए ही सबक होंगे। हालांकि कई बार ऐसा भी हुआ है कि एग्जिट पोल से ठीक उलट भी नतीजे आए हैं। पर दलों के लिए एक सबक छोड़ जाते हैं।

सर्वे एजेंसियों पर जल्दी रिपोर्ट देने को दबाव के चलते ही शहरी इलाकों के मध्यवर्गीय लोगों से बात करके रिजल्ट अक्सर ये एजेंसी दे देती हैं जो कि राज्य के आम या खास लोगों की यह तहरीर नहीं बन पाती। ये एजेंसिया कभी कभी दबाव में काम करते हुए चैनलों के मनमाफिक रिपोर्ट तैयार करके दे देती हैं। जो एजेंसियां ऐसा नहीं करती हैं उन्हें दरवाजा दिखा दिया जाता है। कांट्रैक्ट खत्म करके पारिश्रमिक भी रोक दिया जाता है। ऐसे मामले भी आए हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार 2015 के बिहार चुनाव में आरजेडी और जेडीयू के गठजोड़ को जीतता हुआ दिखाने की सर्वे रिपोर्ट ही एक बड़े चैनल ने प्रसारित होने से रोक दी थी। एग्जिट पोल सर्वे सत्यता की कसौटी पर कितने खरे उतरेंगे यह तो 11 दिसंबर को ही पता चलेगा। तब तक इंतजार कीजिए, नाहक माथापच्ची करने का कोई मतलब नहीं।

(ग्राफिक्स व फोटो साभार)

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here